दिल्ली/कोलकाता की सियासत में हलचल बढ़ाने वाला बयान सामने आया है, जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीजेपी और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि अगर कोई बंगाल में रहना चाहता है तो उसे अपना नाम बंगाल की वोटर लिस्ट में दर्ज कराना चाहिए और दूसरे राज्य (जैसे बिहार) से नाम हटवाना चाहिए—ताकि अधिकारों को लेकर भ्रम न फैले।
बैठक में क्या बोलीं ममता
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने BLA के साथ मीटिंग में कहा कि चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल को बदनाम करने की कोशिश हो रही है और बीजेपी “कम समय में ज्यादा काम” कराने का दबाव बना रही है।
उन्होंने दावा किया कि बीजेपी की तरफ से 1.5 करोड़ और नाम बाहर करने जैसी मांग की जा रही है, और इससे लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश दिखती है।
चुनाव आयोग पर आरोप
ममता बनर्जी ने कहा कि चुनाव आयोग ने 22 से 24 बार निर्देश बदले हैं, जिससे BLOs (बूथ लेवल ऑफिसर) परेशान हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरनेम बदलने (शादी के बाद), बंगाली उच्चारण के कारण अंग्रेजी स्पेलिंग में छोटे बदलाव, या पिता के नाम की वर्तनी में मामूली अंतर जैसी वजहों से नाम काटे जा रहे हैं।
अमित शाह पर सीधा निशाना
सीएम ने गृहमंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि “पूरी चीज़” वही कंट्रोल कर रहे हैं और ऐसा नहीं लगता कि प्रधानमंत्री खुद इसे कंट्रोल कर रहे हैं।
उन्होंने इसे “नोटबंदी के बाद अब वोटबंदी” जैसी स्थिति बताते हुए कहा कि वोट का अधिकार कोई नहीं छीन सकता।
बिहार के लोगों को लेकर बयान
ममता बनर्जी ने कहा कि बंगाल में रहने वाले बिहार के लोगों को कथित तौर पर यह बताया जा रहा है कि अगर वे बिहार में वोट नहीं देंगे तो उन्हें प्रॉपर्टी का अधिकार नहीं मिलेगा, जो गलत है।
इसके बाद उन्होंने कहा कि जो लोग बंगाल में रहते/काम करते हैं, वे अपना नाम बंगाल की वोटर लिस्ट में दर्ज कराएं और बिहार से नाम हटवाएं।