मुंबई बीएमसी चुनाव से पहले महायुति में सीट बंटवारे को लेकर जबरदस्त खींचतान शुरू हो गई है। महायुति की दो सबसे बड़ी सहयोगी पार्टियों, भाजपा और एकनाथ शिंदे गुट के बीच मुंबई पर कब्जे की राजनीतिक रस्साकशी तेज हो गई है।

शिंदे–भाजपा के बीच तकरार

  • मुंबई महानगरपालिका चुनाव के लिए सीटों के बंटवारे पर बीती रात मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच लंबी बैठक हुई, जिसमें फॉर्मूले पर सहमति नहीं बन पाई।
  • भाजपा ने सूत्रों के मुताबिक शिंदे गुट को करीब 90 सीटें देने का प्रस्ताव रखा है, जबकि एकनाथ शिंदे 125 सीटों की मांग पर अड़े हुए हैं।
  • गठबंधन की पहली बैठक में शिंदे गुट ने 125 सीटों की मांग रखी थी, लेकिन तब भाजपा ने सिर्फ 53 सीटें देने का ऑफर दिया था, जो अब बढ़कर लगभग 90 तक पहुंचता दिख रहा है।

महायुति में नई बैठक की तैयारी

  • माना जा रहा है कि सोमवार रात की बातचीत के बाद अब शिंदे और फडणवीस के बीच एक और दौर की मीटिंग होगी, जिसमें सीटों के गणित को अंतिम रूप देने की कोशिश की जाएगी।
  • चर्चा का फोकस सिर्फ मुंबई ही नहीं, बल्कि ठाणे और पुणे महानगरपालिका चुनावों की सीट शेयरिंग पर भी रहा, जहां सभी दल अपना-अपना प्रभाव क्षेत्र सुरक्षित रखना चाहते हैं।

एनसीपी (अजित पवार) की रणनीति पर सस्पेंस

  • इसी बीच एनसीपी (अजित पवार गुट) आज बीएमसी चुनाव को लेकर अहम घोषणा कर सकती है कि वह महायुति के साथ रहेगी या ‘एकला चलो’ की राह अपनाएगी।
  • सूत्रों के मुताबिक, प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे दोपहर 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी की आधिकारिक लाइन साफ कर सकते हैं और कुछ सीटों पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का संकेत दे सकते हैं।

एनसीपी के लिए महायुति की शर्तें

  • महायुति खेमे से अजित पवार को संकेत दिया गया है कि अगर एनसीपी गठबंधन के साथ मुंबई में उतरती है तो उन्हें नवाब मलिक की जगह कोई नया चेहरा आगे करना होगा।
  • साथ ही एनसीपी को सिर्फ 10 से 14 सीटों पर ही संतोष करना पड़ सकता है, यानी बीएमसी में उसकी भूमिका सीमित रखी जा सकती है।

चुनाव कार्यक्रम और दांव पर लगी साख

  • बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है; 15 जनवरी 2026 को मतदान और 16 जनवरी को मतगणना होगी।
  • पूरे महाराष्ट्र के नगर निकायों में कुल 2,869 सीटों पर वोट डाले जाएंगे, जिनमें बीएमसी की 227 अहम सीटें भी शामिल हैं, जो सभी दलों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बनी हुई हैं।
  • महायुति की आधिकारिक सीट-साझेदारी की घोषणा उद्धव ठाकरे द्वारा अपने सीट फॉर्मूले के सामने आने के बाद होने की संभावना जताई जा रही है, ताकि मुंबई में अंतिम रणनीतिक चाल उसी समय चली जाए।

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