बांग्लादेश को लेकर एक चिंताजनक दावा सामने आया है। विदेश नीति और दक्षिण एशिया मामलों के जानकार सुशांत सरीन ने कहा है कि बांग्लादेश मौजूदा दौर में खुद को “ईस्ट पाकिस्तान” के तौर पर देखने की दिशा में बढ़ रहा है और पाकिस्तान से जुड़ी पुरानी जड़ों को फिर से तलाश रहा है।
ANI से बातचीत में सुशांत सरीन ने दावा किया कि बांग्लादेश में इस समय सत्ता संरचना अस्थिर है और जिनके पास वास्तविक प्रभाव है, वे “पाकिस्तान के प्रभाव” में काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की ओर से बांग्लादेश को यह संकेत/आदेश दिए जा रहे हैं कि उसे क्या करना चाहिए और क्या नहीं।
“1971 के बाद पहली बार डिफेंस डील”—सरीन का दावा
सुशांत सरीन ने यह दावा भी किया कि 1971 के बाद पहली बार बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच डिफेंस डील जैसी स्थिति बन रही है। उनके अनुसार, पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान से जुड़े लोग बांग्लादेश के सरकारी तंत्र में प्रभाव बढ़ा रहे हैं और निर्णयों पर असर डाल रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि डिफेंस समझौतों के दायरे में भविष्य में पाकिस्तानी सैन्य कर्मियों के बांग्लादेश आने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। सरीन के मुताबिक, पाकिस्तान की रणनीति बांग्लादेश को भारत के खिलाफ खड़ा करने की हो सकती है।
भारत की नीति पर सवाल: “रणनीतिक सावधानी या पैरालाइसिस?”
विशेषज्ञ ने कहा कि भारत को बांग्लादेश को लेकर अपनी नीति पर पुनर्विचार करने की जरूरत है, क्योंकि भारत का हर कदम रणनीतिक संदेश देता है। उन्होंने टिप्पणी की कि भारत जिस तरह शांत दिख रहा है, वह “रणनीतिक सावधानी” है या फिर “निर्णयहीनता (पैरालाइसिस)”, यह सवाल महत्वपूर्ण है।
सरीन ने यह भी कहा कि भारत को कुछ ठोस कदम ऐसे उठाने चाहिए जिनसे भविष्य के लिए सीख भी बने और पड़ोसी देशों व अंतरराष्ट्रीय समुदाय तक स्पष्ट संदेश जाए।
बांग्लादेश में हिंसा के दावों का जिक्र
सुशांत सरीन ने बातचीत में यह दावा किया कि बांग्लादेश में हालात सामान्य नहीं हैं और हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं। उन्होंने हिंदू समुदाय से जुड़े एक युवक के साथ हुई कथित क्रूर घटना का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं देश की आंतरिक स्थिति की गंभीरता की तरफ इशारा करती हैं।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि का उल्लेख संबंधित रिपोर्ट में नहीं किया गया है।
“रिश्ते तेजी से मजबूत”—पाकिस्तानी अधिकारियों के दौरों की चर्चा
रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश और पाकिस्तान के रिश्ते हाल के महीनों में तेजी से मजबूत होते दिखाई दे रहे हैं। दावा किया गया है कि मोहम्मद यूनुस के दौर में पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों के दौरे बढ़े हैं और रक्षा सहयोग की बातचीत आगे बढ़ी है।
यह भी कहा गया कि पहली बार पाकिस्तानी जहाज बांग्लादेश के कुछ बंदरगाहों तक पहुंचे हैं, जिसे भारत के लिए “चिंताजनक” संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इसके अलावा 1971 युद्ध की भूमिका को लेकर बांग्लादेश की तरफ से बयानबाजी के दावे भी रिपोर्ट में शामिल हैं।