दुनिया के दिग्गज उद्यमी और टेस्ला, स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क ने अपने एक बेटे के नाम को लेकर बड़ा खुलासा किया है। मस्क ने बताया कि उनके बेटे का मिडिल नेम ‘शेखर’ है, जो मशहूर भारतीय-अमेरिकी खगोल भौतिक विज्ञानी और नोबेल पुरस्कार विजेता सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर के सम्मान में रखा गया है।
एलन मस्क ने यह जानकारी एक इंटरव्यू और सार्वजनिक बातचीत के दौरान दी, जिसके बाद यह खबर तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। मस्क के इस कदम को भारत और भारतीय वैज्ञानिक समुदाय के प्रति सम्मान की अनोखी मिसाल माना जा रहा है।
भारतीय वैज्ञानिक से जुड़ा नाम ‘शेखर’
रिपोर्ट्स के अनुसार, एलन मस्क की पार्टनर शिवोन जिलिस, जो न्यूरालिंक में सीनियर एग्जीक्यूटिव हैं, भारतीय मूल से जुड़ी हैं और इसी वजह से बच्चे के नाम में भारतीय कनेक्शन दिखता है। मस्क ने कहा कि उनके एक बेटे का मिडिल नेम ‘शेखर’ रखा गया है, जो नोबेल विजेता वैज्ञानिक सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर से प्रेरित है।
सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर खगोल भौतिकी की दुनिया का बड़ा नाम हैं, जिन्हें 1983 में सितारों की संरचना और विकास पर काम के लिए भौतिकी में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। मस्क के इस फैसले को विज्ञान और स्पेस रिसर्च में भारतीय योगदान के प्रति सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।
सोशल मीडिया पर चर्चा और भारतीय कनेक्शन
जैसे ही यह बात सामने आई कि एलन मस्क ने अपने बेटे के नाम में ‘शेखर’ जोड़ा है, सोशल मीडिया पर इस खबर को लेकर जबरदस्त चर्चा शुरू हो गई। कई यूज़र्स ने इसे “इंडिया और साइंस की ग्लोबल ब्रांडिंग” बताया, तो कुछ ने इसे भारतीय वैज्ञानिकों के लिए गर्व का क्षण कहा।
इंटरव्यू के दौरान मस्क ने यह भी बताया कि उनकी पार्टनर शिवोन जिलिस आधी भारतीय हैं और उन्होंने अमेरिका में भारतीय पेशेवरों के योगदान की खुलकर तारीफ की। मस्क ने कहा कि भारतीय टैलेंट ने अमेरिका को “काफी फायदा” पहुंचाया है।
मस्क के बच्चे और अनोखे नामों की परंपरा
एलन मस्क अक्सर अपने बच्चों के यूनिक नामों को लेकर चर्चा में रहे हैं। उनके बच्चों के नामों में X, AE A-12, स्ट्राइडर, एज्योर, आर्केडिया और सेल्डन जैसे नाम शामिल हैं, जो सोशल मीडिया पर कई बार ट्रेंड कर चुके हैं। अब ‘शेखर’ नाम भी उसी लिस्ट में जुड़ गया है, जो इस बार सीधे तौर पर एक भारतीय वैज्ञानिक और इंडियन ओरिजिन कनेक्शन से जुड़ा है।
माना जा रहा है कि मस्क के इस खुलासे के बाद भारत में भी सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर और वैज्ञानिकों की नई पीढ़ी के प्रति लोगों की रुचि और जागरूकता बढ़ेगी।