नीतीश कुमार से जुड़े “हिजाब कांड” पर कार्रवाई को लेकर सवाल उठने के बीच बिहार के डीजीपी विनय कुमार का बयान चर्चा में है। 22 दिसंबर 2025 को गृह विभाग की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब उनसे मुख्यमंत्री के कथित “हिजाब खींचने” वाले मामले पर पुलिस के संज्ञान/एक्शन को लेकर पूछा गया, तो उन्होंने सीधे तौर पर केस-विशेष पर जवाब देने के बजाय महिला सुरक्षा उपायों और “अभया ब्रिगेड” की योजना पर बात की।

क्या है पूरा मामला

दावे के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर एक महिला चिकित्सक नुसरत परवीन का हिजाब/दुपट्टा खींचने की कोशिश करने का आरोप लगा, जिसके बाद विवाद बढ़ा और विपक्ष ने इस्तीफे तक की मांग की।
इसी विवाद के बीच गृह विभाग की पीसी में डीजीपी से सवाल किया गया कि जब आम मामलों में “दुपट्टा खींचने” पर सख्ती की बात हो रही है, तो मुख्यमंत्री वाले प्रकरण पर पुलिस ने क्या संज्ञान लिया।

DGP का जवाब: केस पर नहीं, “अभया ब्रिगेड” पर फोकस

डीजीपी विनय कुमार ने प्रश्न का प्रत्यक्ष उत्तर नहीं दिया और कहा कि सार्वजनिक स्थलों पर मनचलों से निपटने के लिए “अभया ब्रिगेड” शुरू की गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि 2026 में 2000 स्कूटी खरीदे जाने का प्रस्ताव भेजा गया है, जिन पर महिला पुलिसकर्मी/एएसआई की तैनाती कर स्कूल, कॉलेज और कोचिंग जैसे “संवेदनशील” स्थानों पर गश्त/ड्यूटी कराई जाएगी।

गृह विभाग ने गिनाईं उपलब्धियां

प्रेस कॉन्फ्रेंस में गृह विभाग की ओर से यह भी बताया गया कि 2024 की तुलना में 2025 में हत्या के मामले 7.72% और डकैती के मामले 24.87% कम हुए हैं।
इसके साथ अपराध से अर्जित संपत्ति के मामलों में अपराधियों की पहचान, विरोध प्रस्ताव और संपत्ति जब्ती की कार्रवाइयों का विवरण भी साझा किया गया।

विपक्ष के सवाल, सरकार पर दबाव

इस प्रकरण में विपक्ष का कहना है कि यदि सामान्य नागरिक के मामले में सख्ती की बात होती है, तो संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के आरोपों पर भी समान मानक लागू होने चाहिए।
वहीं, प्रशासनिक स्तर पर फिलहाल सार्वजनिक मंच पर केस-विशेष पर स्पष्ट “एक्शन अपडेट” सामने न आने से बहस और तेज हो गई है।

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